
गर्भ केवल शरीर में बढ़ता हुआ जीवन नहीं, बल्कि ईश्वर का सीधा आशीर्वाद होता है। जब कोई स्त्री माँ बनती है, तो वह केवल एक नया जीवन नहीं, बल्कि िपूरी सृष्टि की नई कहानी रचती है। भारतीय परंपरा में गर्भावस्था को देवत्व की अवस्था कहा गया है- क्योंकि इस समय माँ और शिशु दोनों पर दिव्य ऊर्जाएँ काम करती हैं।
गर्भावस्था- पवित्र साधना-
वेद और पुराणों में गर्भ को आध्यात्मिक यात्रा बताया गया है। जब माँ के मन में शुभ विचार, प्रेम और शांति होती है, तो वही संस्कार गर्भस्थ शिशु में भी उतरते हैं।
गर्भवती स्त्री को भगवान का ही रूप माना जाना जाता है क्योंकि वह नए जीवन को धारण करती है। इस अवस्था में उसके शब्द, विचार, भाव, सब ब्रम्हा की तरह प्रभाव डालते हैं.

सकारात्मक विचारों की भत्ति-
गर्भवती स्त्री का मन जितना शांत और प्रसन्न रहेगा, बच्चा उतना ही उज्जवल और संस्कारी बनेगा।
इसलिए इस समय-
क्रोध और चिंता से दूर रहें।
शुभ संगीत, मंत्र और कथा सुनें।
प्रकृति के साथ समय बिताएँ।
माँ का मन मंदिर बन िजाए तो बच्चा देवता बनकर जन्म लेता है।
भगवग्दीता का पाठ, श्रीकृण्ण या राम की कथा, और भजन और शिव कथा सुनना इस समय मन को स्थिर और पवित्र बनाता है।
पवित्र कथा- अभिमन्यु की कहानी
महाभारत में एक प्रसिध्द कथा है। अभिमन्यु की। कहा जाता है कि जब सुभद्रा गर्भवती थीं, तब अर्जुन ने उसे चक्रव्यूह भेदन की विद्य़ा सुनाई। अभिमन्यु ने गर्भ में रहते हुए वह ज्ञान सुन लिया, और युदृद में वही कौशल दिखाया। यह कथा हमें सिखाती है कि गर्भस्थ शिशु सब सुनता और सीखता है। इसीलिए कहा गया है कि गर्भावस्था में-
. माँ को भगवान की कथा सुननी चाहिए।
. सुंदर संगीत, मंत्र और श्लोक का पाठ करना चाहिए।
देवी और मातृत्व की आभा-
हमारे शास्त्रों में देवी पार्वती, माता सीता और यशोदा को मातृत्व की शक्ति का प्रतीक माना गया है। उनका जीवन सिखाता है कि माँ का धैर्य, श्रध्दा और स्नेह किसी भी शक्ति से बड़ा होता है।
गर्भवती के लिए शुभ कार्य-
हर सुवह सूर्य को जल अर्पण करें। और ओम नमः शिवाय या ओम नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें, तुलसी और गायत्री मंत्र का पाठ करें, और रोज मुस्कराना न भूलें क्योंकि माँ की मुस्कान बच्चे की पहली शिक्षा है।
भोजन और भाव दोनों पवित्र रखें– जैसे शरीर को पौष्टिक भोजन चाहिए, वैसे ही मन को भी सकारात्मक भावनाओं का आहार करना चाहिए, भोजन बनाते और खाते समय भगवान का स्मरण करना हैं।
निष्कर्ष- गर्भ मे पलता प्रेम
गर्भ केवल एक जैविक प्रक्रिया नहीं, यह प्रेम का भाव है। माँ का हर विचार अपने बच्चे के बारे में रहता हैं ईश्वर ने हर महिला को सृजन की शक्ति दी है इसीलिए माँ धरती पर भगवान का सबसे सुंदर रूप है। माँ बने रहना केवल एक अवस्था नहीं, एक अनुभव है जो आत्मा को भी पवित्र कर देता है।
हे माँ, तू धन्य है क्योंकि तेरे भीतर जीवन का दीपक जलता है। तेरी गोद मेें ईश्वर की झलक है। शांति, प्रेम और प्रकाश सदा तेरे गर्भ में पलते रहें।
,शिव कथा की कहानी पढ़े-https://hindimebatao.com/shiv-katha-in-hindi/

Bahut pasand aya or sahi jankari mili ,thanks you.