बागेश्वर धाम मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में हैं, यह ऐक अध्यात्मिक और धार्मिक स्थल है, जो आज अपने भारत में बहुत बड़ी पहचान बना चुुका है, यहाँ के पीठाधी श्वर पण्डित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री हैं, जिन्हें उनके भक्त बाबा या महाराज के नाम से पुकारा जाता हैं। यह दिव्य दरवार लाखों करोंड़ो भक्त गणों का प्रमुख केन्द्र बन गया है।

बागेश्वर धाम की सेवा-
बागेश्वर धाम हनुमान जी को समर्पित एक सिध्द क्षेत्र माना जाता है, यह स्थान पहले छोटा सा ग्रामीण मंदिर था। लेकिन बीते कुछ वर्षों में यहाँ श्रध्दालुओं की संख्या तेजी से बढ़ने लगी और यह अध्यात्मिक केन्द्र के रूप में विकसित हुआ। इस मंदिर में विशाल हनुमान , यज्ञशाला, साधना स्थल, रसोई व्यवस्था और भक्तों के लिए आवश्यक सुविधाएँ मौजूद हैं। इसके अलावा, धाम की सेवा केवल पूजा-पाठ का केन्द्र नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा, गौ-सेवा यज्ञ संत-संवाद और जनसेवा का भी केन्द्र बन चुका है।
भव्य दरवार और अर्जी-
बागेश्वर धाम सरकार में अर्जी लगती हैं हर मंगलवार और को दिव्य दरवार लगता है भक्त बड़ी संख्या में पहुँचकर अर्जी लगाते हैं इसके अलावा, उनकी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है, और अपनी समस्या को एक पर्ची पर लिखकर ले जाते है वहाँ पीठाश्वर द्वारा उस पर्जी पर लिखी सारी समस्या खुद पढ़ कर बता देते है। बिना देखे कि उसमें क्या लिखा है। यह धाम हनुमान जी की कृपा का केन्द्र है।
धीरेन्द शास्त्री के बारे में-
बागेश्वर धाम की लोकप्रियता श्री धीरेन्द्र कष्ण शास्त्री जी के कारण वशेष रुप से बढ़ी है, बचपन से उन्हें आध्यात्मिकता , कथा, कीर्तन, वेद-पुराणों में मन था, उनकी अध्यातमिक शक्ति उन्हें अपने दादा गुरू से मिली थी। उनका जन्म छतरपुर जिले के गढ़ा गाँव में साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ।
खास बातें पीठाश्वर के वारे में –
. संस्कार, धर्म और भारतीय संस्कृति पर ज्यादा ध्यान देना
. लोगों के कष्ट मिलाटा उन्हें बताना आपकी समस्या क्या है
. सरल जीवन और हनुमान जी की भक्ति में लीन और गुणगान करना
अपनी वातों में मिठास और सत्य की बात करना
अर्जी लगाने का तरीका। नारियल का महत्व-
बागेश्वर धाम में आर्जी लगाने के लिए एक नारियलत को लाल रंग के कपड़े में बांधकर धाम परिसर में ले जायें। यदि आपकी अर्जी शादी-विवाह से जुड़ी हैं तो पीले कपड़े में नारियल को बांधकर ले जायें और यदि आर्जि भूत प्रेत से जड़ी है तो काले कपड़े में नारियल को बांधकर ले जायें लेकिन अर्जी को अपने घर पर भी मंगलवार को लाल कपड़े में नारियल बांधकर पूजा स्थल पर रखें। बागेश्वर धाम जाने के लिए दिन मंगलवार व शनिवार को जाना सबसे सही रहेगा। साथ ही इस दिन भीड़ ज्यादा रहती है। तो आप एक रात रूकना बेहतर विकल्प होगा।
सामाजिक कार्य-
यह धाम केवल धार्मिक ही अपितु अपने भारत के व विश्व जनकल्याण के सामाजिक कार्यों पर भी जोर देता हैं. गरीबों की मदद- गरीब परिवार की मदद करना उन्हें भोजन प्रतिदिन दिया जाना साथ ही शिक्षा व आर्थिक सहायता भी करना।नशामुक्ति कार्य- महाराज जी नशा के खिलाब अभियान चलाते रहते है। नशा घर तोड़ता है, अपनो को अपने से दूर करता है, जीवन का नाश करता है, इससे दूर रहो।
भक्तों का अनुभव और लोकप्रयता बढ़ने ता मुख्य कारण-
भक्तो को अनुभव हुआ है, कि दरवार में जाने से उन्हें भक्ति और उनके अपने रूके हुये कार्य पूर्ण हुए है, और आर्थिक कमजोरी दूर हुयी है, साथ ही उन्हें अच्छा अनुभव मिला है। जिससे वे लगातार जाते रहने से पीछे नहीं हटते इसके अलावा, गुणगान भी करते है। पहले, चमत्कार का अनुभव हुआ लोगों को लोगों का भावात्मक जुड़ाव बड़ता गया। सोशल मीडिया का प्रभाव हुआ। लोगों ने महाराज के वीडियो शेयर किये और उनकोे बड़ावा देने का कार्य किया यह लोगों काे पसन्द आया कि कोई भक्त इतना सच्ची श्रध्दा से अपने पूजा पाठ के बल पर इतनी शक्ति रखता है जो सनातन के लिए हमेशा एक शक्तिशाली निर्माण की बात आयी।
निष्कर्ष-
बागेश्वर धाम आज एक ऐसा स्थान बन गया है, इसी कारण, जहाँ लोग केवल धार्मिक कारणों से नहीं, बल्कि मानसिक शांति, समाधान और आध्यात्मिक अनुभव की इच्छा से आते हैं। यहाँ की भक्ति-परंपरा, गुरू-शिष्य संबंध, सामाजिक सेवा, और दिव्य दरवार आस्था, संस्कृति और सेवा इन तीनों का सुंदर संगम बागेश्वर धाम को एक आध्यात्मिक केन्द्र बनाता है।
