राम मंदिर अयोध्या

अयोध्या राम मंदिर फोटो
राम मंदिर अयोध्या

अयोध्या का नाम लेते ही हमारे मन में एक, पवित्र, दिव्य और सद्भाव जाग उठता है। मानो ऐसा लगता है कि राम हमारे पास आ रहे है। त्रेता युग में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि माना जाता है, लाखों वर्षों से अयोध्या भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, आस्था का केंन्द्र रही है। यहीं जन्में भगवान राम ने अपना संपूर्ण जीेवन धर्म, कर्तव्य और मर्यादा को समर्पित किया।

मंदिर का इतिहास और विवाद कैसे बना-

मध्यकाल में विदेशी आक्रमणों के दौरान भारत के अनेक प्राचीन मंदिरों को तोड़ा गया। 1528 के आसपास मुगल काल के सेनापति ने उस स्थान पर मस्जिद का निर्माण कराया, जहाँ पहले राम जन्मभूमि मंदिर माना जाता था। सदियों तक हिंदुओं और मुसलमानों के बीच यह विवाद चलता रहा। हिंदू मानते रहे कि यह जन्मभूमि स्थल रामलता का जन्मस्थान है, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा था कि यहाँ मस्जिद थी। उन्नीसवीं सदी से लेकर 20वीं सदी तक कई मुकदमे चले, बहसें हुई और मामला अदालतों में लंबा चला। 1992 में विवाद ने बड़ा रूप ले लिया। यह मामला वर्षों तक अदालत से समाज तक चर्चा का मुख्य केंद्र बना रहा।

राम मंदिर का इतिहास और धार्मिक महत्व-

अयोध्या रामायण काल से ही प्रतिष्ठित नगर रहा है। वाल्मीकि रामायण, तुलसीदास की रामचरितमानस, स्कंद पुराण और अन्य ग्रंथों में भी अयोध्या को अत्यंत पवित्र बताया गया है। मान्यता है कि राजा दशरथ के महल में भगवान राम का जन्म हुआ था। यही वह स्थान है जिसे बाद में राम जन्मभूमि के रूप में जाना गया। अयोध्या केवल धार्मिक नगर ही नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता का केंन्द्र रहा है। यहाँ पर कई राजवंशों ने शासन किया, अनेक मंदिर बने, और ऋषियों-मुनियों ने तपस्या की। रामायण काल से लेकर आज तक अयोध्या की पवित्रता, महिमा और आदर में कोई कमी नहीं आई।

अदालदी और ऐतिहासिक प्रकिया

सन् 2002 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। 2010 में हाई कोर्ट ने भूमि को तीन हिस्सों में बांटने का निर्णय दिया। परंतु दोनों पक्ष इस फैसलेे से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे, इसलिए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 9 नवंबर 2019 को भारत के सु्प्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और सर्वसम्मत फैसला सुनाया। अदालत ने ASI की रिपोर्ट, ऐतिहासिक प्रमाणों, धार्मिक आस्थाओं और सभी साक्ष्यो को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया जाए।

.विवादित भूमि पर ही राम जन्मभूमि थी।

.पूरी भूमि हिंदू पक्ष को मंदिर निर्माण के लिए दी जाए।

.मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ भूमि दी जाए।

यह फैसला देश के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि इसने दशकों पुराने विवाद का शांतिपूर्ण समाधान किया।

राम मंदिर की खास विषेशताएँ

. मंदिर तीन मंजिला है। लंबाई लगभग 380 फीट और चौड़ाई 250 फीट है।

. 392 स्तंभों पर आधारित है।

. प्रत्येक स्तंभ पर सुंदर शिल्पकारी और देव प्रतिमाएँ।

. गर्भगृह मेंं बाल रूप में रामलला की मनमोहक प्रतिमा।

. मंदिर परिसर में सीता, लक्ष्मण, भरत शत्रुघ्न, हनुमान और देवी-देवताओं के अन्य मंदिर भी शामिल होंगे।

अयोध्या में पर्यटन

राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या का महत्व और भी बढ़ गया है। हर दिन लाखों लोग दर्शन के लिए आते हैं।

. रोजगार के अवसर में बढ़ोत्तरी हुई।

. होटल, परिवहन, गाइड आदि क्षेत्रों में विकास हुआ।

.देश-विदेश में अयोध्या की पहचान बढ़ी।

. धार्मिक पर्यटन में तेजी आई।

सरकार ने पूरे शहर को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के लिए योजनाएं बनाई हैं, जैसे- चोड़ी सड़कें, घाटों का विकास, रामपथ, भक्ति मार्ग, सरयू नदी के किनारे सुदर्यीकरण आदि।

निष्कर्ष

अयोध्या राम मंदिर का निर्माण केवल ईंट-पत्थरों से बना भवन नहीं है। यह करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं, वर्षों के संघर्ष, आस्था और विश्वास का परिणाम है। यह भातर की सांस्कृतिक विरासत का पुनः जागरण है। राम मंदिर आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देगा कि सत्य की राह पर चलने वाला कभी पराजित नहीं होता। राम मंदिर न केवल अयोध्या की शान है, बल्कि यह पूरे भारत के लिए गर्व का प्रतीक है।

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