
सभी माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा जीवन में सफल बने, आत्मनिर्भर हो और अच्छे संस्कारों वाला इंसान बनें। इस सफलता की पहली सीढ़ी शिक्षा है, और शिक्षा का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव स्कूल है। आज के बदलते समय में स्कूल सिर्फ पढ़ने-लिखने की जगह नहीं रहा, बल्कि बच्चों के सम्पूर्ण विकास का केंद्र बन चुका है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि बच्चों को स्कूल क्यों जाना चाहिए और स्कूल का बच्चे के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। साथ ही हमें अपना भविष्य खुद चुनना है।
शिक्षा का महत्व उसके आधार पर पढ़ना- लिखना
स्कूल वह स्थान है। जहाँ बच्चा सबसे पहले पढ़ना, लिखना और समझना सीखता है।
- स्कूल में बच्चा अक्षर, शब्द और भाषा सीखता है।
- गणित के बेसिक जोड़, घटाव, गुणा, भाग सीखकर बुद्धि का विकास होता है।
- यह मूलभूत शिक्षा जीवन भर काम आती है। इसी के साथ, मनोविकाश होता है।
बिना स्कूल शिक्षा के बच्चा, बच्ची जीवन की बुनियादी चीज़ों से भी वंचित रह सकता है।

अनुशासन ओर जीवन का महत्व समझना जरूरी है जो सिखाता है-
स्कूल बच्चों को जीवन का बड़ा महत्वपूर्ण गुण सिखाता है—अनुशासन
- समय पर उठना, और साथ ही धरती माता को प्रणाम करना।
- समय पर स्कूल पहुँचना।
- होमवर्क समय पर करना।
- कपड़ों और सामान को संभालना साथ ही, खुद को एक अच्छी संगत में रखना।
ये सभी आदतें बच्चे को जिम्मेदार बनाती हैं। जीवन में सफलता ज्ञान और अनुशासन पर निर्भर करती है।
समाज में रहना, विकास, दोस्ती कैसे बनाके चलने है
बच्चा घर पर माता-पिता से ही बातचीत करता है, लेकिन स्कूल में वह अलग-अलग स्वभाव वाले कई बच्चों से मिलता जुलता है।
- टीमवर्क सीखना
- दोस्ती को निभाना
- सम्मान करना अपने से बड़ो का
- अपनी बात रखना दूसरों के सामने
- दूसरों को सुनना ओर ध्यान देना
ये सभी गुण स्कूल के माहौल में ही विकसित होते हैं।
एक बच्चा जो स्कूल जाता है, वह सामाजिक रूप से अधिक मजबूत और आत्मविश्वासी बनता है। ओर खुद में बदलाव लाता है।
जीवन जीने के तरीके सीखना
स्कूल में बच्चे सीखते हैं
- समस्या का समाधान निकालना
- दूसरों के साथ मिलकर काम करना ओर साथ देना
- चुनौतियों का सामना करना विवेक पूर्ण
- भावनाओं को संभालना खुद पर हावि ना होने देना
ये गुण जीवन भर काम आते हैं। ओर हमें बहुत कुछ सिखाते है।
बच्चे को सही रास्ता चुनना उनके हाथों में हो सकता है यदि
जब बच्चा स्कूल जाता है, उसका समय पढ़ाई लिखाई, खेल और गतिविधियों में व्यतीत होता है।
इससे वह मोबाइल, टीवी, गलत संगत, या गंदे विचार पनपना आदतों से दूर रहता है।
स्कूल बच्चों को सकारात्मक दिशा देता है। ओर कुछ नया सोचने की सीख देता है।
माता पिता की चिंता कम होना
स्कूल से बच्चे—
- अनुशासन में रहना
- पढ़ाई करना
- व्यवहार वनाये रखना
सब कुछ सीखते हैं, जिससे माता-पिता पर सारा बोझ नहीं पड़ता।
माता-पिता के सहयोग और स्कूल की शिक्षा मिलकर बच्चे का पूरा विकास करती है। साथ ही वह जो अपने बच्चे के बारे में सोचता रहता है वह उसकी चिंन्ता का कारण बनती है जिसमें उसे निदान मिलता है कई हद तक।
निष्कर्ष निकलता है
बच्चों के लिए स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि जीवन की वास्तविक और असली शुरुआत है।
यहाँ बच्चे का शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक और नैतिक विकास होता है,
स्कूल का माहौल बच्चे को आत्मनिर्भर, समझदार, शिक्षित और ज़िम्मेदार बनाता है,
