Google Sandbox और Honeymoon Effect क्या होता है?

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दोस्तों आज आपको हम Google Sandbox Effect क्या है और Google Honeymoon Effect किसे कहते हैं इस तरह की विशेष जानकारी को आपके साथ साझा करेंगे यदि आप नए ब्लॉगर हो और आपकी वेबसाइट में Quality Content होने के बावजूद भी आपकी वेबसाइट rank नहीं कर रही है या उसमे  में ट्रैफिक नहीं आ रहा है. 

और आप सोच रहे हो अरे यार मैं बहुत मेहनत करता हूं दिन रात एक कर के article post  कर अपनी वेबसाइट में डालता हूं पर फिर भी मेरी वेबसाइट गूगल के सर्च इंजन पेज में टॉप पर नहीं दिख रही है अगर ऐसा ही रहा तो मैं अपना ब्लॉगिंग करियर छोड़ दूंगा तो ऐसा सोचना बंद करो और आज की google sandbox kya hai और honeymoon effect kya hai  यह पोस्ट पुरे आत्मविश्वास के साथ पढ़िए.  

वो कहावत तो सुनी ही होगी 

सब्र का फल मीठा होता हैं 

Google Sandbox Effect क्या है?

Google sandbox effect उस समय को कहते हैं जब आप की वेबसाइट गूगल के सर्च इंजन में अच्छे से रैंक नहीं कर पाती क्योंकि आपकी वेबसाइट अभी बिल्कुल गूगल के हिसाब से नई है. जिसे गूगल को समझने के लिए थोड़ा टाइम चाहिए होता है क्योंकि शुरुआत में google search engine में आपकी वेबसाइट को दिखाता है लेकिन अपने हिसाब से उसकी ranking को तय करता है. 

यह वही समय है जब आपने  हाल ही में Blogging Career में शुरुआत की हैं और शुरू के चार या पांच मंथ के बाद भी आपकी वेबसाइट पर ना के बराबर ट्रैफिक आता है. क्योंकि यह गूगल खुद आपके वेबसाइट पर  ट्रैफिक भेजता है.

आपने अपनी वेबसाइट का ऑप्टिमाइजेशन बहुत ही अच्छा किया है और आप डेली बेसिस पर यूनिक आर्टिकल भी पोस्ट कर रहे हो फिर भी आप की वेबसाइट गूगल के सर्च इंजन रिजल्ट पेज में रैंक नहीं कर पाती क्योंकि गूगल इसे खुद रैंक नहीं करता है वह शुरुआत में आपकी वेबसाइट को अच्छे से testing कर identify करता है.

यदि आप नए ब्लॉगर हो तो गूगल सैंडबॉक्स टाइम को फेस जरूर करेंगे क्योंकि एक समय में हमने भी इसे सहा है. तो आप हिम्मत हार के ब्लॉगिंग करियर छोड़ मत देना 

Google Sandbox Effect कितने समय का होता है?

वैसे तो इसका समय निश्चित नहीं हैं लेकिन Blogging Experts की माने तो यह नए ब्लॉगर या नई वेबसाइट के लिए शुरुआत में 1 से लेकर 6 माह तक या उससे भी ज्यादा हो सकता है अगर आपने गूगल के Algorithm को फॉलो करते हुए अपनी वेबसाइट के कंटेंट  को develop ना किया हो.

Google Sandbox का इतिहास

Google sandbox साल 2004 में सबसे पहले लाया गया था जहां पर Black hat SEO की सहायता से काफी सारे ऐसे लोग थे जो अपनी वेबसाइट को सर्च इंजन में टॉप पोजीशन पर रैंक करवाते थे इसी के चलते बाद में गूगल ने साल 2012 में Google penguin update एल्गोरिथ्म को लांच किया जिसका काम इस तरह की वेबसाइट को पेनल्टी लगाना था जो links spam, bad link, clocking और कई सारी ब्लैक हैट seo technique का यूज कर ट्रैफिक को बढ़ाते थे.

हालांकि गूगल सैंडबॉक्स इफेक्ट की गूगल द्वारा कभी भी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है लेकिन हमें इस बात को मानना होगा कि जब हमारी साइट नई होती है तो वह तुरंत रैंक नहीं कर पाती इस बात को लेकर कई seo expert भरोसा करते  है.

Google Sandbox में Website क्यों चली जाती है?

आपका ब्लॉग या website जब बिल्कुल नई होती है तो यह गूगल के सैंडबॉक्स इफेक्ट को face  करती है जो कि एक तरह से सही भी है गूगल सेंड बॉक्स में अपनी वेबसाइट जाने के कई कारण हो सकते हैं जिसमें से हम आपको नीचे कुछ खास रीजन बता रहे हैं.

  • आपकी वेबसाइट बिल्कुल new है.
  • आपके वेबसाइट के अंदर अभी तक क्वालिटी कंटेंट और यूनिक पोस्ट मौजूद नहीं है.
  • हो सकता है आपकी वेबसाइट में मैक्सिमम कांटेक्ट कॉपीराइट हो.
  • आपने सही से seo optimization नहीं किया हो.

Google Sandbox में Website कैसे Check करें?

क्या मेरी website Google sandbox mein hai या नहीं यह पता करने के लिए हमारे पास कोई ऐसा टूल मौजूद नहीं है लेकिन आप गूगल सर्च कंसोल की मदद से यह पता कर सकते हैं की क्या आपकी पोस्ट आपके Focus या Primary keyword पर रैंक कर रही है या नहीं क्योंकि आपने अक्सर देखा होगा गूगल सर्च कंसोल में आपके टारगेट कीवर्ड पर impression नहीं आते बल्कि दूसरे ही कीवर्ड पर impression  दिखते हैं तो समझ जाइए कि आपकी वेबसाइट अभी गूगल सैंडबॉक्स में है और हम एक अंदाजा लगा सकते हैं मान लीजिए आपने नया ब्लॉग बनाया और उस पर 30 से 40 High quality content पोस्ट लिखे हैं उसके बावजूद आपकी वेबसाइट या वेब पोस्ट गूगल के टॉप पेज पर सबसे लास्ट में या सेकंड पेज पर आ रही हैं.

लेकिन कुछ दिनों बाद आप देखते हो की वही आर्टिकल सेकंड या थर्ड पेज पर चले जाता है ऐसा क्यों होता है क्योंकि गूगल आपकी वेबसाइट को सेंड बॉक्स में रखता है वह देखता है कि users  किस तरह आपके कांटेक्ट को पसंद कर रहे हैं या नहीं और साथ ही वह यह भी चेक करता है कि आप सिर्फ वेब पोस्ट काउंट बढ़ाने के लिए ही पोस्ट कर रहे हो या क्वालिटी भी दे रहे हो.

Google Sandbox से बहार कैसे निकले?

Google sandbox effect से बाहर निकलने के लिए आपको शुरुआत में बहुत मेहनत करनी होगी क्योंकि आपकी वेबसाइट स्टार्टिंग मैं इतनी पॉपुलर या यूं कहे की आपके वेबसाइट का डोमेन अथॉरिटी अभी बिल्कुल जीरो है तो आपको इसके लिए काम करना शुरू करना चाहिए नीचे कुछ खास पॉइंट दे रहा हूं जिनको फॉलो कर आप गूगल सैंडबॉक्स इफेक्ट से काफी हद तक कवर कर सकते हो.

1 starting से ही unique content और informative content लिखें जिससे लोगों को आपका आर्टिकल पसंद आए

2 article posting quantity को ज्यादा ना बढ़ाएं पहले क्वालिटी कंटेंट देने का प्रयत्न करें क्योंकि गूगल को क्वालिटी कंटेंट बहुत पसंद आता है.

3 वेबसाइट में seo सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन को प्रॉपर रेगुलेट करें

4 Website की loading speed को कम करें जिसके लिए आप अच्छा सा थीम इंस्टॉल करें

5 अगर आपकी वेबसाइट वर्डप्रेस मैं बनी है तो unnecessary plugin को अनइनस्टॉल कर दीजिए

6 यदि आप की वेबसाइट Blogger पर बनी है तो उसमें सेटिंग में जाकर सर्च ऑप्शन को सही से सेटअप कर ले

7 Quality backlinks बनाए जिसके लिए आप सोशल मीडिया, फोरम पोस्टिंग कर सकते हैं.

8 Google Search Console में कोई प्रॉब्लम हो तो उसे तुरंत आईडेंटिफाई कर फिक्स करें

9 image optimisations करना बेहद जरूरी है क्योंकि आपकी वेबसाइट का स्पीड काफी हद तक कम हो सकता है.

10 कभी भी शुरुआत में उन keywords types को टारगेट ना करें जिन पर ऑलरेडी लाखों-करोड़ों पोस्ट लिखे हुए हैं और गूगल में अच्छे से Rank कर रहे हैं. 

11 best keyword research process को फॉलो करें और low कंपटीशन एंड long-tail केवट पर ज्यादा काम करें

12 सिर्फ एक माइक्रो niche पर काम करें जिससे गूगल और आपकी वेबसाइट के अंदर एक अच्छा relation maintain हो और गूगल आप की वेबसाइट पर ट्रस्ट करें जिसके बाद आप की वेबसाइट की डोमेन वैल्यू बढ़ती है.

13 keyword golden ratio दोस्तों इस kgr techniques से आप गूगल के टॉप 10 रिजल्ट में बहुत ही कम समय में आ सकते हो 

Honeymoon Effect क्या है?

यह google sandbox effect के समान ही होता हैं  लेकिन इसमें गूगल आपकी वेबसाइट के कुछ pages को show करता है. Google honeymoon effect सिद्धांत यह होता है कि Google नई content को खोज परिणामों के शीर्ष पर रैंक करेगा ताकि यह परीक्षण कर  सके कि उपयोगकर्ता इसे पसंद करते हैं या नहीं।

यदि CTR (click through rate) और Bounce back दरें इंगित करती हैं कि उपयोगकर्ता जानकारी को पसंद नहीं करते हैं तो Google ट्रैफिक को कम कर देता है। 

नई साइट को गूगल में रैंक होने के लिए काफी समय लगता है जबकि पुरानी साइट बार-बार टॉप पर दिखाई जाती है इसकी एक ही वजह होती है अभी आपकी वेबसाइट और गूगल के सर्च इंजन के बीच में कोई विश्वास नहीं है आपकी वेबसाइट में यूजर्स के लिए कितनी ओरिजिनल और यूजर फ्रेंडली कंटेंट देती है यही सब चेक करने के लिए गूगल हनीमून इफेक्ट लाता है। 

शुरुआत में आपकी वेबसाइट नई रहती है जिसके चलते आपकी Page Authority  और Domain Authority  बहुत ही कम होती है 

यह  वही समय होता है जब गूगल और आपकी वेबसाइट एक दूसरे को समझ कर रैंकिंग बढ़ाते हैं गूगल आप की वेबसाइट पर जचता है कि कोई स्पैमी कंटेंट तो नहीं है और वह देखता है की कोई seo factor तो impact  नहीं कर रहे हैं जैसे कि Click through rate CTR, conversion rate, Pogo sticking , dwell time etc 

Google के Honeymoon Period से Recover कैसे करें?

इस तरह की प्रॉब्लम से छुटकारा पाने के लिए आपको वही टेक्निक का इस्तेमाल करना होगा जो हमने ऊपर बताया है गूगल सैंडबॉक्स के लिए वह दोनों गूगल sandbox  और google honeymoon effect के लिए work  करते हैं 

इन्हें भी पढ़े : Featured Snippet क्या है ? और अपने पोस्ट इसमें कैसे show करवाएं ? 

Conclusion

आज आपने देखा कि Google sandbox effect kya hota hai aur honeymoon effect kise kahate Hain इस तरह की गूगल एल्गोरिथ्म को  फेस करना नए ब्लॉगर के लिए बहुत ही मुश्किल भरा पार्ट होता है कई सारे नए ब्लॉगर गूगल के सैंडबॉक्स पीरियड में ही अपनी उम्मीदें खो देते हैं और ब्लॉगिंग करियर को छोड़ देते हैं

मैं आप लोगों को यह यकीन दिलाता हूं कि यदि आपने सब्र के साथ अपने ब्लॉग पोस्ट पर काम किया और उसमें हाई क्वालिटी कांटेक्ट पोस्ट किया तो 1 दिन आपको गूगल के टॉप पेज पर rank करने से कोई रोक नहीं सकता

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