Google Tag Manager क्या होता है और इसमें सही Account कैसे बनाए?

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क्या आपके दिमाग में भी इस तरह के सवाल आ रहे है Google tag manager kya hai आखिर Google tag manager in Hindi का इस्तेमाल कैसे कब और क्यों करना चाहिए क्या उसे एक ब्लॉगर अपनी ब्लॉगिंग में यूज कर सकता है

गूगल टैग मैनेजर से जुड़ी सारी महत्वपूर्ण जानकारी जिसे हम आपको आज इस पोस्ट के माध्यम से बताने जा रहे हैं यदि आप अपनी वेबसाइट लोडिंग स्पीड को बढ़ाना चाहते हैं तो गूगल टैग मैनेजर का इस्तेमाल जरूर कीजिए क्योंकि इसके कई सारे फायदे हैं  

यदि आपको अपनी वेबसाइट पर बार-बार डेवलपर के साथ कांटेक्ट करके उसमें एनालिटिक्स कोड या snippet code डालने पड़ते  हैं जिससे आपकी वेबसाइट काफी स्लो हो जाती हैं अब आपको इन दोनों समस्याओं से सॉल्यूशन सिर्फ गूगल टैग मैनेजर ही दे सकता है

Google Tag Manager (GTM) क्या है?

यह गूगल के द्वारा दिया गया फ्री टूल है जिसे 1 अक्टूबर 2012 मैं लाया गया था जिसकी हेल्प से आप ना सिर्फ अपनी वेबसाइट के अंदर बल्कि अपने मोबाइल ऐप मैं भी टैग के जरिए  इवेंट ट्रैकिंग और कन्वर्जन मेजर कर सकते हो 

इसे अन्य भाषा में Central tag management system भी कह सकते हैं जिसको हमें अपनी website  या application के साथ जोड़ना होता है

गूगल टैग मैनेजर की मदद से आप अपनी वेबसाइट की loading speed  को बेहतर कर सकते हो क्योंकि हर छोटी से छोटी tags  इंस्टॉल करने के लिए बार-बार वेबसाइट source code  में जाकर edit  नहीं करना पड़ता

आपको सिर्फ गूगल टैग मैनेजर पर अकाउंट बनाना है और यहां आप अपने कोड को इंटीग्रेट कर सकते हैं eg गूगल एनालिटिक्स, फेसबुक पिक्सल, ट्विटर, लिंक्डइन, Google remarketing tag इत्यादि  

Google tag manager के जरिए ना सिर्फ गूगल बल्कि थर्ड पार्टी एप्लीकेशन के ट्रैकिंग कोड यानी कि tags को यूज कर सकते हैं और यदि आपको कोई अपना कस्टम टैग बनाना हो तो वह भी आप कर सकते हो

Google Tag Manager Account Setup

अकाउंट सेटअप करने के लिए सबसे पहले गूगल पर गूगल टैग मैनेजर सर्च करें जिसके बाद आपको फर्स्ट में ही गूगल टैग मैनेजर की ऑफिशियल वेबसाइट देखेगी marketingplatform.google.com जिस पर आप क्लिक कर नीचे दी गयी steps को फॉलो कर अकाउंट बनाना शुरू करें

1 सबसे पहले right top corner पर क्रिएट अकाउंट बटन या start for free पर क्लिक करें 

2 जिसके बाद आपको नीचे दी गई इमेजेस जैसा फॉर्म दिखाई देगा इसमें सबसे पहले

3 अपना अकाउंट नेम डालें कंट्री select करें

4 अपनी वेबसाइट का नाम कंटेनर नेम सेटअप में डाले

5 आपको google tag manager किस प्लेटफार्म पर इंस्टॉल करना है वह टारगेट प्लेटफार्म सिलेक्ट करें जैसे कि eg website, iOS, Android, AMP (accelerated mobile pages) and server 

6 create button पर क्लिक करने के बाद एक ऑप्शन एग्रीमेंट फॉर्म आएगा जिसमें सिलेक्ट कर एग्री करें

7 अब आपको गूगल टैग मैनेजर के द्वारा वेरिफिकेशन कोड दिया जाएगा जिसे अपनी वेबसाइट के header section और दूसरा कोड body section में इंस्टॉल करना है  

 अगर आपकी website wordpress पे बनी हुई है तो फिर आप गूगल टैग मैनेजर फॉर वर्डप्रेस प्लगइन के थ्रू इंस्टॉल कर सकते हो

Google Tag Manager काम कैसे करता है?

हमे Google tag manager की working समझने के लिए सबसे पहले इसके तीन मुख्य कंपोनेंट को समझना होगा जो container के मैन पार्ट होते हैं जैसा कि आपको नीचे बताया गया है

Tags यहां पर javascript code या थर्ड पार्टी snippet of code होता है जिससे हम कुछ अपने tracking code लगाते है 

Triggers इसका  काम होता है GTM को बताना कि आपके TAG कब एक्टिवेट हो इसके अंदर वह सारे इवेंट ट्रैक किए जाते हैं जैसा कि लिंक क्लिक, फॉर्म सबमिशन, स्क्रोल डाउन, स्क्रोल अप,डाउनलोड  इत्यादि

Variable इसके अंदर गूगल टैग मैनेजर के लिए टैग और ट्रिगर से रिलेटेड एडिशनल जानकारी होती है

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Google Tag Manager के फायदे

1 गूगल टैग मैनेजर का इंटरफेस कॉफी यूजर फ्रेंडली होता है जिसे चलाना बिल्कुल आसान है

2 गूगल टैग मैनेजर का यूज़ करने से आपको बार-बार अपने डेवलपर के साथ इंटरेक्ट नहीं करना पड़ेगा

3 इसकी हेल्प से आप अपने tag को पब्लिश करने से पहले ही प्रीव्यू या debug कर सकते हो 

4 Website loading speed काफी बढ़ जाती है

5 गूगल Tag manager के जरिए आप अपने वेब पेजेस को और भी ज्यादा बेहतरीन ऑप्टिमाइज कर सकते हो

6 गूगल टैग मैनेजर के अंदर built-in tag होते हैं जिससे नॉर्मल डिजिटल मार्केटर या ब्लॉगर भी आसानी से यूज कर सकते हैं जिसके लिए हमें कोडिंग नॉलेज की जरूरत नहीं है eg Google analytics, adwords etc

7 Event tracking:  यह गूगल टैग मैनेजर का सबसे खास फीचर्स है जहां पर आप अपनी वेबसाइट पर हो रहे इवेंट को आसानी से track कर सकते हैं eg clicks, Video engagement,form submission etc 

8 Custom templates: इसके अंदर कई सारे कस्टम टेंप्लेट होते हैं जहां पर आपको अपनी वेबसाइट ने कोड इंस्टॉल नहीं करना पड़ता

9 Better security: गूगल टैग मैनेजर का यूज करने से आपकी वेबसाइट में एक तरह से सिक्योरिटी लेवल भी बढ़ता है क्योंकि यहां पर हम सारे थर्ड पार्टी कोड इसी प्लेटफार्म पर इंस्टॉल करते हैं ना कि अपने वेबसाइट के कोड में जहां पर अगर कोई वायरस हो तो यही पर डिटेक्ट हो जाता है

10 User permission: गूगल टैग मैनेजर के थ्रू आप अन्य यूजर को  परमिशन भी दे सकते हो किसे कितना access देना है 

11 गूगल टैग मैनेजर के जरिए ना सिर्फ वेबसाइट बल्कि iOS, Android app, AMP pages, server को भी ट्रैक कर सकते हैं

क्या आप जानते है : Google Sandbox और Honeymoon effect क्या होता हैं ?

FAQ

1. Google Analytics और Google Tag Manager दोनों में क्या अंतर है?

हम Google tag manager के जरिए आप अपनी website में JavaScript tracking code जिसे हम tag कहते हैं website में install न करते हुए एक central tag platform पर रखते हैं वहीँ दूसरी ओर Google analytics tracking code के अंदर भी tag होते हैं लेकिन यह हमें एक report बना कर देते हैं जिससे हम अपनी website के अंदर आने वाले traffic को देख सकते हैं और event का पता लगा सकते हैं।

2. Google Tag Manager किसे Use करना चाहिए?

अगर आप एक सामान्य blogger है और आपका मकसद सिर्फ blogging से पैसे कमाना है तो फिर आप Google tag manager को optional के तौर पर use कर सकते हैं आपको इसको use करने की जरूरत नहीं है लेकिन अगर आप ads campaign चलाना चाहते हो तो आपको Google tag manager की जरूरत पड़ेगी क्योंकि इसकी सहायता से आप उन users को target कर सकते हो जो आपकी website पर आते हैं।

Conclusion

आज आपने सीखा की Google tag manager kya hota hai in Hindi और इस पर अकाउंट कैसे बनाते हैं दोस्तों हमने पूरी कोशिश की है आपको गूगल टैग मैनेजर को कैसे इंस्टॉल करना के बारे में  बेसिक जानकारी 

यदि आपको Google tag manager kya hai पोस्ट अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ जरूर साझा करें और हमें गूगल टैग मैनेजर से जुड़ी किसी भी तरह की प्रॉब्लम को कमेंट करके जरूर बताएं

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