भगवान शिव हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। वे संहारकत्रा, दयालु और सरल स्वभाव वाले देवता माने जाते हैं। उनकी कथाएँ भक्तों की भक्ति, धैर्य और त्याग का संदेश देती हैं। नीचे दी गई शिव कथा सरल भाषा में लिखी गई है जिससे सभी लोग आसानी से समझ सकें।

भगवान शिव की प्रसिध्द कथा
प्राचीन समय में दक्ष प्रजापति नामक राजा था। उसकी एक सुंदर और भक्तिमती पुत्री थी-सती। सती मन, वचन और कर्म से भगवान शिव की अनन्य भक्त थीं और उनसे विवाह करना चाहती थीं।
दूसरी ओर, दक्ष को भगवान शिव का तपस्वी और सरल जीवन पसंद नहीं था। उसके मन में अहंकार भरा था। जिसके बावजूद, सती ने अपने दृढ़ संकल्प और भक्ति के बल पर शिवजी को पति रूप में प्राप्त कर लिया। विवाह के वाद सती कैलाश पर्वत पर शिवजी के साथ आनंदपूर्ण जीवन बिताने लगीं।
एक दिन दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया। उसने सभी देवताओं को निमंत्रम दिया, परंतु भगवान शिव और सती को आमंत्रित नहीं किया। सती ने जब यह जाना, तो वे व्यथित हो गईं। शिवजी ने कहा कि बिना बुलाए वहां जाना उचित नहीं, पसंतु सती फिर भी पिता के यज्ञ में पहुँच गईं।
वहाँ पहुँचकर सती को यह देखकर दुःख हुआ कि यज्ञ में शिवजी का अपमान किया जा रहा है। पिता के इस अपमान को सहन न करते हुए सती ने यज्ञ अग्नि में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए।
जब यह समाचार भगवान शिव को मिला, तो वे क्रोधित हो उठे। उन्होंने वीरभर्द और भूतगणों को भेेजकर यज्ञ को नष्ट कर दिया और दक्ष का अहंकार चकनाचूर हो गया।
इस कथा से सीख मिलती है कि अहंकार का अंत अवश्य होता है और सच्ची भक्ति से भगवान को अवश्य प्राप्त किया जा सकता है।
शिव कथा से मिलने वाली सीखः-
. सच्ची भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती ।
. अहंकार का अंत हमेशा विनाश में होता है।
. प्रेम और विश्वास का संबंध पुनर्जन्म तक चलता है।
. शिवजी सरलता, त्याग और धैर्य के प्रतीक हैं।
Conclusion:-
भगवान शिव की कथा हमें भक्ति, विनम्रता और धेर्य का संदेश देती है। शिवजी अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और जीवन में सुख व शांति प्रदान करते हैं। यदि यह कथा आपको पसंद आए तो इसे दूसरों के साथ साझा करें।
आरतीः-
